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पानी को बाजारीकरण की काली छाया से बचाने के लिए जल क्रान्ति का आगाज

Posted On: 3 Nov, 2015 Others में

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यह नए जमाने की क्रांति है जिसे सरकार ने जल क्रान्ति का नाम दिया है | तेजी से बढ़ती जनसंख्या ,विकास के कारण ज्यादा होतीं जरूरते और जलवायु परिवर्तन ऐसे कारक है जिनकी वजह से पानी की पूर्ति मांग के मुताबिक़ कठिन होती जा रही है | अगला विश्व युद्ध पानी को लेकर होने की भविष्यवाणी नितांत अतिशियोक्ति पूर्ण नहीं है | जिस तरह पानी की वजह से गावो से लेकर राज्यों तक में विवाद छिड़ रहे है उनके मद्देनजर देश में भी कानून व्यवस्था की गंभीर समस्याये पैदा हो रही है इसीलिए सरकार ने मौके पर सचेत होना लाजिमी समझा | जल क्रान्ति अभियान के पीछे यही मुख्य प्रेरणा है | इसमें निहित है जलसंरक्षण एवम प्रबंधन को सुद्रढ करने के लिए सभी संबंधितों को शामिल करके एक जन आन्दोलन चलाना |
इसके तहत जो प्रयास किये जायेंगे उनमे जलसंरक्षण के अलावा चाहे सिचाई हो या अन्य उपयोग पानी की किफायत की चेतना पैदा करना और उसकी दक्षता लाना , बारिश का पानी जो बहकर बर्बाद चला जाता है उसे रीचार्जिंग की कारगर तकनीको के जरिये पाताल को भरे रखने में इस्तेमाल करना और पानी की शुद्धता को मेंटेन करना | इन योजनाओं में पंचायती राज व स्थानीय निकाय संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना भी जलक्रान्ति का एक महत्वपूर्ण बिन्दु है |
सरकार ने तय किया है कि देश के ६७२ जिलों में प्रत्येक में एक एक जलग्रस्त गाँव चुना जाएगा जिसे जलप्रबंधन के लिहाज से एक पूर्ण गाँव के रूप में तैयार करके माडल के रूप में खड़ा किया जायेगा | ऐसे गाँव ,में सभी जलस्रोतों का खाका तैयार करके उनके विकास और पुनरुद्धार की कार्य योजना लागू की जायेगी | गावों में कुएं , तालाब व् बाबड़ी जैसी जलसंरचनाये बदलते परिवेश के कारण विलुप्त होती जा रही है जबकि पानी के दुर्लभ होते परिप्रेक्ष में इनकी ओर फिर मुह ताकने की नौबत आ रही है | जलाक्रान्ति अभियान के बहाने इनको सहेजा जा सकेगा | जल ग्राम में जल जमाव वाले क्षेत्रों के लिए बायो ड्रेनेज की व्यवस्था भी की जायेगी | जल संरचनाओं के निर्माण से लेकर प्रबंधन तक में आधुनिक तकनीक को गावो तक पहुचाने के साथ साथ परम्परागत जानकारी और तकनीक को भी नए सिरे से बल प्रदान करने की मंशा इसमे जोड़ी गयी है |
जल ग्राम के माडल को सभी स्तरों पर अंजाम दिया जाएगा फिर बात भले ही गावो की हो या शहरों की | जल पेशेवरों का जल मित्र संवर्ग बनाना इस क्रान्ति की अहम् कड़ी है | गावो में खराब हेंडपम्प ठीक करना हो , पाइपलाइन परियोजना को ओपरेट करना हो या जल शुद्धता की जांच करना यह संवर्ग उक्त सारे काम गाँव के स्तर पर ही कर देगा | जल क्रान्ति अभियान की रूपरेखा अत्यंत व्यापक है | इसमें सरकारी गैर सरकारी सभी संगठनो के जल विशेषज्ञों को जोड़ा जायेगा | किसानो की भीं सक्रिय भागीदारी रखी जायेगी और फेक्ट्रियों व अन्य श्रोतों से आने वाले खराब पानी को रिसाइकिल कर इस्तेमाल योग्य बनाने की अवधारणा भी इसमे निहित है | इसके अलावा हर राज्य में १००० हेक्टेयर क्षेत्रफल को माडल कमांड क्षेत्र बनाया जाएगा |
पुराने समय में जल निकायों से लोगो की जीविका जुडी हुई थी | जैसे तालाबों में मछली पालन , सिघाड़ा की पैदावार और रस्सी बनाने जैसे आमदनी के काम होते थे जिससे अपने आप उनका रख रखाव होता रहता था | इसी से सबक लेकर जलक्रान्ति को आजीविका संवर्धन से जोड़ने का भी ख़याल रखा गया है | अभियान की भावना को बल प्रदान करने के लिए यह आवश्यक किया गया है कि जल क्रान्ति की गतिविधि के लिए हर संस्था एक ही तरह का तय सुदा लोगो इस्तेमाल करेगी | अन्ततोगत्वा जल परियोजना का दायित्व समुदाय को सौपना भी जल क्रान्ति का एक महत्वपूर्ण घटक है |
इस समय पानी के बाजारीकरण की होड़ मची हुई है | पानी की हर समय शुद्ध और भरपूर उपलब्धता का प्रलोभन दिखाकर निजी कम्पनिया जल संसाधनों पर कब्जा जमाने की फिराक में है | अगर उनके इरादे सफल हुए तो हर तरह की जरूरत का पानी पैट्रोल के बराबर महँगा हो जाएगा और पानी जैसी बुनियादी जरूरत पूरी करना केवल संपन्न लोगो के बूते की बात रह जायेगी | इसके चलते कैसा हाहाकार मचेगा यह कल्पना तक भयावह है | इसलिए सरकार ने जल क्रान्ति की पहल समय रहते हुए की है जिसे कामयाब करना सरकार का ही नहीं लोगो का भी उद्देश्य होना चाहिए ताकि पानी पर बाजारीकरण की काली छाया को रोका जा सके |

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